Thursday, March 12, 2009


क्या अजब है ...यह कैसा हुनर देखते हैं ...
हम खुद पे ...उनकी फुरक़त का असर देखते हैं ....!!!

मेरी निगाहों में ....बसा रहता है चेहरा उनका ....
और वो हैं की ...हमे बे-मुर्र्वत, बे-खबर देखते हैं ...!!

वो बरहम हुआ है ....तो कुछ तो बात रही होगी ...
क्या रह गयी थी.. हमसे कसर देखते हैं ...!!

उनका आना, फिर चले जाना ..तो एक मुक्कद्दर ही था ....
अब कैसे होगी अपनी.... ये बसर देखते हैं ...!!!

क्या बताएं की क्या मिला ... तोहफा-ए-इश्क हमें ......
रात तन्हाइयों में ...चाक-ए-जिगर देखते हैं ...!!!

क़फ़स-ए-उल्फत में जिंदगी का हाल न पूछो ....
हम खुद को कितना .. होता हुआ बे-असर देखते हैं ....!!!

हमसे मरासिम का वो शायद रख भी ले कुछ भरम ....
बड़े खलिश से हम राह-गुज़र देखते हैं ...!!

लौट भी आओ ...कठिन बड़ी है ... राह-ए-जिंदगी ....
की हम तुझमे ही अपना हम-सफ़र देखते हैं ...!!

(फुरक़त- to get separated; बे-मुर्रुवत- unconcerned; बरहम- upset;
चाक-ए-जिगर: wounded heart; क़फ़स -ए -उल्फत:prison of love;)

7 comments:

Prashant Saraswat said...

Yeh shayar hain, ya Physicist hain ya fir philosopher hain ...sonchna padegaa....
kahin lover to nahin!!!!

noopur said...

subhaanallah..!!!
tareef kar sake tere is hunar ki beintihaan...
wo shabd kahan se layen ab hum ye dekhte hain....!!!

Mani said...

wah!!! useaad wah!!! bohat khoob.lagta hai ghalib ji ki aatma aa gaye hai..tumhari shayri main.

Shiksha Sopan said...

hum tumhari prashansha karne pahucha the yahan...
lekin abb lagta hai ki appretiation ka cake tumko noopur ke saath share karna padega !

this is good baba...
I 'm reading this for the 2nd time

Bacteria said...

Taareef karoon kyaa aapki

yaa aapki shaayari ki

Jadoosaa chaa gayaa hai jaise

humpe, aapki in behtareen shabdon ki!

Kyaa baat hai dost, kyaa baat ...

Peeyush..... said...

:) :)

Thnks to you all...!!!!

Ami Ananya said...

Kya baat hai! Bahot khub.