Sunday, May 31, 2009


वो जब भी मिला ..एक फासला रहा..
मुझको उससे... बस यही गिला रहा..

कर पाते जो शिकायत हम .. उससे ..उसी की
..मुझमें कभी ना इतना हौंसला रहा..

तमाम उम्र मैंने मानी है..उसकी हर शर्तें ..
मुझको मंजूर ..उसका हर फैसला रहा...!!!

उसके आने पर खुलूस सी..उसके जाने पर खलिश ..
मेरी जिंदगी का बस यही सिल-सिला रहा...!!!

वो मिला तो था,एक हमसफ़र कि तरह..राह-ए-जिंदगी में ...
अब संग मेरे...फ़कत यादों का काफिला रहा..!!!

मेरे गम का ,मेरी ख़ुशी से मरासिम क्या कहिये ..
जैसे पानी में कोई बुलबुला रहा..!!!!

वोह सुनाता था अक्सर ... मुझे किस्से तन्हाइयों के ....
क्या खबर उसे....की मैं कितना अकेला रहा.....!!

मुमकिन है..मेरे हिस्से थीं...और भी लज्जत-ए-हयात...
पर मैं तो बस..उसी के ख्यालों में मुब्तिला रहा....!!!

अब शिकयतें क्या करनी... अपनी ही किस्मत से 'साहिल'
सो मान लिया की...खैर, जो भी रहा ..अच्छा रहा, भला रहा...!!


(खुलूस सी: sweet feeling; खलिश: anxiety; लज्जत-ए-हयात: Good things of life; मुब्तिला : entangled)

7 comments:

noopur said...

mere dil ke haal ko... shayad wo samajhta hai bahut khoob...
uski gazlon mein mere dard ka..charcha khoob raha...!!!

ritin said...

wah wah, kya likha hai. Yeh gham ki wajah kaun hai mirza peeyush.

ritin said...

bahut khoob mirza sahay. Kya asahayni dard hai aapki composition mein.

Mani said...

Aap ki is muskaan ke peechye itne gum chipye hue hain aisa lagta to nahi phir ye dard kahan se aa jata hai???aur bhi khushiyan hain zindagi main unhye bhi talasshiye......ameen

spirit said...

gr8 work man.....this one is very much improved with professional touch of shayar 'Peeyush'.....
We request a mushayra from you whenever you will b in India.....

Shree said...

waah bahut khoob, bahut hi achchi gazal hai......

Sheena said...

i m touched :(

-Sheena