Friday, July 3, 2009

क्या गरज उसे पड़ी... वो क्यूँ हमपे एतबार करे...?
हम जो दीवाने हैं... तो हैं... वोह क्यूँ हमसे प्यार करे...?


ख्वाहिश है पाने की... इसे, उसी चेहरे को...
ख्वाबों में जिसका... ये दीदार करे....!!!


इस दिल-ए-नादान के... शौक भी हद हैं...
कोई इस दिल-ए-नादान का.. कुछ तो .. मेरे यार करे...!!!


एक हुजूम है.. दिवानो का ... मुन्तजिर में उसके ...
क्या बड़ी बात.. जो हम जाँ निसार करें..?


कभी तो टूटता दिखता है.. बाँध मेरे सब्र का...
आखिर कब तक... कोई किसी का... इंतजार करे..........!!!


और, जबकि मालूम है तुझे.. दूरियां.. चाँद सितारों की 'साहिल'...
जिद उसे छूने की..... फिर क्यूँ ...बार बार करे...?



(मुन्तजिर - to be awaited for some one )

Saturday, June 20, 2009




अब अपनों से क्या शिकवा ..क्या गिला करना...
हमने छोड़ दिया है अब... भला करना...!!!

उसका तस्सवुर ही तो सहारा है...जीने के लिए...
क्यूँ भूल जाता है उससे मुब्तिला करना..!!!

वो अगर नहीं करता ...तो तू ही सही...
मिले जब भी वो..उसी जज्बे से मिला करना..!!!

तेरे इश्क को भी होना है आबाद एक दिन....
थोडा सब्र रखना...जरा हौंसला करना...

जंग जो चलती है ..तो चलने दे
...जेहन -ओ -दिल की...
"साहिल"... तू अपने दिल से ही फैसला करना...!!!

(tassawur: memories,dreams; mubtila : entangled; jazba: enthusiasm; jehen-o-dil : mind and heart)

Sunday, May 31, 2009


वो जब भी मिला ..एक फासला रहा..
मुझको उससे... बस यही गिला रहा..

कर पाते जो शिकायत हम .. उससे ..उसी की
..मुझमें कभी ना इतना हौंसला रहा..

तमाम उम्र मैंने मानी है..उसकी हर शर्तें ..
मुझको मंजूर ..उसका हर फैसला रहा...!!!

उसके आने पर खुलूस सी..उसके जाने पर खलिश ..
मेरी जिंदगी का बस यही सिल-सिला रहा...!!!

वो मिला तो था,एक हमसफ़र कि तरह..राह-ए-जिंदगी में ...
अब संग मेरे...फ़कत यादों का काफिला रहा..!!!

मेरे गम का ,मेरी ख़ुशी से मरासिम क्या कहिये ..
जैसे पानी में कोई बुलबुला रहा..!!!!

वोह सुनाता था अक्सर ... मुझे किस्से तन्हाइयों के ....
क्या खबर उसे....की मैं कितना अकेला रहा.....!!

मुमकिन है..मेरे हिस्से थीं...और भी लज्जत-ए-हयात...
पर मैं तो बस..उसी के ख्यालों में मुब्तिला रहा....!!!

अब शिकयतें क्या करनी... अपनी ही किस्मत से 'साहिल'
सो मान लिया की...खैर, जो भी रहा ..अच्छा रहा, भला रहा...!!


(खुलूस सी: sweet feeling; खलिश: anxiety; लज्जत-ए-हयात: Good things of life; मुब्तिला : entangled)

Wednesday, April 8, 2009


मुझे उनको मनाने का करीना ना आया ..
उनकी भी जबीं पे.. कभी पसीना ना आया ..!!!

मैं फ़कत लड़ता ही रहा..लहरों से..गम-ए- यार की...
साहिल पे कभी मेरे सफीना ना आया..!!

मेरा साकी भी..बरहम ही रहा..मुझसे उम्र तमाम..
लग्जिश मेरी ..मुझको अदब-ए-पीना ना आया..!!!

एक मुद्दत से जंग है..ज़हन-ओ दिल के दरम्यान..
एक मुद्दत से उनमें ..सकीना ना आया..!!!

अहद -ए-तर्क करते फिरते हैं..हर नाकामियों के बाद..
मुझ ही को शायद सलीका -ए -जीना ना आया..!!!

(करीना: rule/skill; सफीना: boat; बरहम:upset; लग्जिश:mistake; ज़हन: mind;
सकीना: peace; अहद -ए-तर्क: promise to withdraw; सलीका: ways)



Wednesday, April 1, 2009


ऐसे खुशकिस्मत कहाँ ..कि कोई हमसफ़र मिले..
बस जाए मेरी नज़रों में....कोई ऐसी नज़र मिले ..!!!

मिल न सका पनाह.. हमे एक बस्ती- ए- दिल में..
मिलने को ...यूँ तो.. कई सेहरा -ओ-शहर मिले....!!!

ऐ काश कि, कभी तो करम हो,... और आये रु-ब-रु ..
वो जो ख्वाबों में मुझको अक्सर मिले..!!

एक मुझको ही उसकी संग दिली का इल्म न था..
बाकी सब ..इस से बा-खबर मिले..!!!

झूझता फिरता हूँ तल्खियों से जमाने की..
मुझए कभी तो कुछ फिरदौस-ऐ -नज़र मिले...!!!

इंतहा अब और क्या होगी...
मुझको खुशियों में भी नौहागर मिले....!!

अब के मिला बजाहिर..तो पूछूंगा बेरुखी का सबब..
की मेरे उम्मीद-ओ-बीम को कोई तो दर मिले..!!!


(तल्खियां- bitterness; फिरदौस -ए-नज़र: paradise for the sight;
नौहागर :mourner/lamentor; बजाहिर - face to face; उम्मीद -ओ -बीम : expectations & dissappointment )



Thursday, March 12, 2009


क्या अजब है ...यह कैसा हुनर देखते हैं ...
हम खुद पे ...उनकी फुरक़त का असर देखते हैं ....!!!

मेरी निगाहों में ....बसा रहता है चेहरा उनका ....
और वो हैं की ...हमे बे-मुर्र्वत, बे-खबर देखते हैं ...!!

वो बरहम हुआ है ....तो कुछ तो बात रही होगी ...
क्या रह गयी थी.. हमसे कसर देखते हैं ...!!

उनका आना, फिर चले जाना ..तो एक मुक्कद्दर ही था ....
अब कैसे होगी अपनी.... ये बसर देखते हैं ...!!!

क्या बताएं की क्या मिला ... तोहफा-ए-इश्क हमें ......
रात तन्हाइयों में ...चाक-ए-जिगर देखते हैं ...!!!

क़फ़स-ए-उल्फत में जिंदगी का हाल न पूछो ....
हम खुद को कितना .. होता हुआ बे-असर देखते हैं ....!!!

हमसे मरासिम का वो शायद रख भी ले कुछ भरम ....
बड़े खलिश से हम राह-गुज़र देखते हैं ...!!

लौट भी आओ ...कठिन बड़ी है ... राह-ए-जिंदगी ....
की हम तुझमे ही अपना हम-सफ़र देखते हैं ...!!

(फुरक़त- to get separated; बे-मुर्रुवत- unconcerned; बरहम- upset;
चाक-ए-जिगर: wounded heart; क़फ़स -ए -उल्फत:prison of love;)

Thursday, March 5, 2009



नज़रों में जिसके गौहर की शफक हो ....
गेसूं जो बिखरे तो गुलाबों की महक हो ....!!!

बहारें खुद आ कर जिसकी मेजबानी करे .....
गुलज़ार खुद जिसकी गुल -अफ्सानी करे ...!!!

मुस्कराहट पे निसार जिसके .. ये जमी , ये फलक हो ....
नूर - ए -रुक्सन ऐसा , जैसे सुबह की उफक हो .....!!!

पलकों पे सजा हो ....शबनम का हुबाब .....
एक चेहरा ऐसा , जैसे सुनहला ख्वाब .....!!

अंगडाई में जिसके ...कैफ हो ....कशिश हो .....
अंदाज़ -ए -गुफ्तगू भी ....अजीम -ओ -नफीस हो ...!!!

लफ्जों में हो जिसके हो .....शहद -ए -शीरीं .....
मुख्तलिफ हो हर अदा , और हर अदा बेहतरीन ....!!!

निखत -ए -जिस्म से मिले .... ज़हन को सुकूं....
एक शख्सियत जिसकी ....अदाएं कुछ हो यूं ..!!

ऐ काश की हकीकत यह नाजनीन हो जाए ...
दुआएं हो कुबूल ...आमीन हो जाए ...!!!


(Gauhar: Moti/Pearl ; Shafak:shining ; Gesun:hairs ;
Gulzar: Garden; Gul-Afsaani: To scatter flower;
Noor-e-Ruksan: glow of the face ; Ufaq: Horizon;
hubaab: Bubbles/Drops;
Angdaai: ; Kaif: sm thing which can hypnotise, or intoxicate; Kashish: Attraction/Luring ; Shevaa-e-Taslim: style of greeting; Azeem-o-nafees:Grand and Excellent;
Sheereen: Sweet; Mukhtalif: of different type/ not common; Nikhat-e-jism: The fragrance of the body; Zehen-Mind/thought; waaez- a wise/religious man; harf-ba-harf: word by word/Literally )