क्या गरज उसे पड़ी... वो क्यूँ हमपे एतबार करे...?हम जो दीवाने हैं... तो हैं... वोह क्यूँ हमसे प्यार करे...?ख्वाहिश है पाने की... इसे, उसी चेहरे को...ख्वाबों में जिसका... ये दीदार करे....!!!
इस दिल-ए-नादान के... शौक भी हद हैं...कोई इस दिल-ए-नादान का.. कुछ तो .. मेरे यार करे...!!!एक हुजूम है.. दिवानो का ... मुन्तजिर में उसके ...क्या बड़ी बात.. जो हम जाँ निसार करें..?कभी तो टूटता दिखता है.. बाँध मेरे सब्र का...आखिर कब तक... कोई किसी का... इंतजार करे..........!!!और, जबकि मालूम है तुझे.. दूरियां.. चाँद सितारों की 'साहिल'...जिद उसे छूने की..... फिर क्यूँ ...बार बार करे...?
(मुन्तजिर - to be awaited for some one )